Chhath-Puja-Ghat

हजारों भक्त सूर्य भगवान को अपना सम्मान देने के लिए नतमस्तक होते हैं. छठ बिहार का सबसे सम्मानित और पवित्र त्यौहार है। यह गहरी जड़ें लोक संस्कृति और राज्य की विरासत के बारे में बताती है। छठ शब्द छः दिन को दर्शाता है क्योंकि यह अमावस्या (दिवाली) से छठे दिन शुरू होता है। सूर्य भगवान को समर्पित, छठ को 24 घंटों से अधिक समय तक पानी के बिना व्रत से किया जाता है। पार्वतीन (जो पर्व / पूजा का मानते है) इन दिनों में पूर्ण सात्विकता से व्रत संपन्न करते हैं. आइये आज हम इस परम पावन व्रत के बारे में जाने और इसकी वैज्ञानिक विशेषता के बारे में भी.

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छठ क्या है?
छठ सूर्य भगवान के प्रति आदर दिखाने के लिए एक त्यौहार है, जो पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखते है। इस त्यौहार के साथ, बिहार के लोगों, विशेष रूप से महिलाएं सूर्य भगवान को अर्घ्य देती हैं और उनको फलों तथा शुद्धः घी से निर्मित पकवानो का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा, परिवार के सदस्यों की भलाई और समृद्धि के लिए प्रार्थना भी की जाती है। ये पकवान ज्यादा तर गंगा के जल से ही निर्मित होता है. आपको सुन के ये आश्चर्य होगा की छठ एकमात्र हिन्दू का ऐसा त्यौहार है जिसमें सूर्य की उपासना की जाती है और कोई मूर्ति पूजन नहीं होता.

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परंपरागत रूप से, यह त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है, एक बार गर्मियों में और दूसरी बार सर्दियों के दौरान मनाया जाता है। कार्तिक छठ अक्टूबर या नवंबर के महीने के दौरान मनाया जाता है और यह कार्तिका शुक्ला षष्ठी पर किया जाता है जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिका के महीने का छठा दिन है। दिवाली के बाद 6 वें दिन मनाया जाता है, एक अन्य प्रमुख हिंदू त्यौहार, यह आम तौर पर अक्टूबर-नवंबर के महीने के दौरान आता है। यह गर्मियों के दौरान भी मनाया जाता है और इसे आमतौर पर चैती छठ के नाम से जाना जाता है। यह होली के कुछ दिनों बाद मनाया जाता है। छठ पूजा को इस साल चार दिनों में मनाया जा रहा है, 11 वीं से 14 नवंबर 2018 तक, सूर्य षष्ठी (मुख्य दिन) 13 नवंबर 2018 को गिर रहा । इस त्यौहार का प्रमुख प्रसाद होता है, गुड़ और घी द्वारा निर्मित पकवान जिसे लोग “ठेकुआ” कहते हैं.

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छठ पूजा क्यों मनाया जाता है?
छठ पूजा की उत्पत्ति की कई कहानियां हैं। यह माना जाता है कि प्राचीन काल में, छठ पूजा को द्रौपदी और हस्तीनापुर के पांडवों ने उनकी समस्याओं को हल करने और अपने खोए हुए राज्य को वापस पाने के लिए मनाया था। सूर्य की पूजा करते समय ऋग्वेद ग्रंथों के मंत्रों का जप किया जाता है। जैसा कि कहानी में आता है, इस पूजा को पहली बार सूर्य पुत्र कर्ण ने शुरू किया था, जिन्होंने महाभारत की युद्ध के दौरान अंग देश (बिहार में भागलपुर) पर शासन किया था। वैज्ञानिक इतिहास या बल्कि योग का इतिहास प्रारंभिक वैदिक काल की तारीख है। किंवदंती का कहना है कि उस युग के ऋषि और ऋषि ने इस विधि का उपयोग भोजन के किसी बाहरी माध्यम से रोकने और सूर्य की किरणों से सीधे ऊर्जा प्राप्त करने के लिए किया था।

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छठ पूजा के अनुष्ठान
छठी माया, जिसे “उषा” के नाम से जाना जाता है, सूर्य की छोटी बहन हैं, की पूजा की जाती है। छठ त्यौहार में कई अनुष्ठान शामिल हैं, जो अन्य हिंदू त्यौहारों की तुलना में काफी कठोर हैं। इन्हें आमतौर पर नदियों या जल निकायों में डुबकी लेने, सख्त उपवास (कोई उपवास की पूरी प्रक्रिया में पानी भी नहीं पी सकता), पानी में सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय खड़ा होकर प्रार्थन करना होता है.

  • नहाय- खाये:
    पूजा के पहले दिन, भक्तों को पवित्र नदी गंगा में स्नान करना होता है और खुद के लिए उचित भोजन बनाती है। चने की दाल के साथ कद्दू भात का सेवन किया जाता है. ये प्रसाद स्वरुप ही होता है जिसे मिट्टी या कांस्य के बर्तन और आम लकड़ी के उपयोग से मिटटी के चूल्हे पर पकाया जाता है। उपवास महिलाएं इस दिन यही ग्रहण करती है.

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  • लोहंडा या खरना:
    महिलाएं शाम तक उपवास करती हैं और पूरे दिन अनुष्ठान करती हैं। शाम को, महिलाएं अपने उपवास तोड़ती हैं और खीर, पुरी और फलों का सेवन करती हैं। इन महिलाओं को “परवातिन” कहा जाता है.

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  • संध्या अर्घ्य
    तीसरे दिन घर पर प्रसाद तैयार करके और शाम को, व्रतिन अपने द्वारा निर्मित सभी भोग लगाने वाले पदार्थों को “दौरा” में रख कर अपने सर पे उठा कर घाट तक जाते हैं. इस दिन की छटा देखने लायक होती है. हर तरफ छठ के गीत और पूरा घाट तक जाने का रास्ता स्वच्छ होता है. अस्ताचल गामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही सभी अपने घरों को लौटते हैं.

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  • उषा अर्घ्य:
    सूर्योदय होने से पहले ही सभी लोग गंगा के पावन तटों पे पहुंच जाते हैं और सूर्य की पहली किरण का इंतज़ार करते हैं. उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पणा करने के आठ ही यह व्रत संपन्न होता है.
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छठ पूजा का वैज्ञानिक महत्व
धार्मिक महत्व के अलावा, इन अनुष्ठानों से जुड़े कई वैज्ञानिक तथ्य भी हैं। भक्त आम तौर पर सूर्योदय या सूर्यास्त के दौरान नदी के किनारे प्रार्थना करते हैं और वैज्ञानिक रूप से इस तथ्य के साथ समर्थित है कि सौर ऊर्जा में इन दो समय के दौरान अल्ट्रावाइलेट विकिरण का निम्नतम स्तर होता है और यह शरीर के लिए वास्तव में फायदेमंद है। यह पारंपरिक त्यौहार आपको सकारात्मकता सिखाता है और आपके दिमाग, आत्मा और शरीर को स्वच्छता प्रदान करने में मदद करता है। यह शक्तिशाली सूर्य की खोज करके आपके शरीर में सभी नकारात्मक ऊर्जा को हटाने में मदद करता है।

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ज्यादा तर लोग इस समय अपने पैतृक स्थान पे आना पसंद करते हैं. त्रिने में काफी भीड़ भी होती है इस दौरान. सरकार तथा रेलवे आपसी सहयोग से काफी स्पेशल ट्रैन का इंतज़ाम करती हैं. ये एक ऐसा वैदिक त्यौहार है जो सबके दिलों को छू जाता है. अगर आप भी इस छठ में ट्रैन में आने वाले हैं तो अपने टिकट तथा PNR का स्टेटस चेक करे , तथा अपने यात्री के दौरान ट्रैन में खाना ऑनलाइन बुक करा लें ताकि कोई परेशानी न हो.

Chhath- The Pious Vedic Festival of Colors & Flavors

Amit Roy


Amit is a Digital Marketing Strategist at Railrestro. He is a marketing maven with proven track record when it comes to digital marketing. In short he’s the buzz creator over digital platforms for every business verticals he handles and help the client achieve their target ROI. His hobbies include travelling, listening music and reading science fictions.


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